Description
शरणागति श्री भक्ति विनोद ठाकुर द्वारा रचित एक अत्यंत भावपूर्ण और आत्मिक ग्रंथ है, जो पूर्ण आत्मसमर्पण के सिद्धांत को केंद्र में रखता है। इस ग्रंथ में यह स्पष्ट किया गया है कि भक्ति का वास्तविक आरंभ तब होता है जब साधक अपने अहंकार, भय और स्वावलंबन को त्यागकर भगवान की शरण में प्रवेश करता है।
ग्रंथ के पदों और विचारों में दीनता, विश्वास, आत्मनिवेदन और भगवद्-कृपा पर पूर्ण आश्रय का भाव झलकता है। यह पुस्तक न केवल पढ़ने योग्य है, बल्कि आत्मचिंतन और प्रार्थना के लिए भी अत्यंत उपयुक्त है।





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